Why did Jharkhand senior minister write a letter to Nitish Kumar and complain about corruption

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पटना: झारखंड में भ्रष्टाचार का मुद्दा या आरोप लगना एक आम बात है, लेकिन झारखंड सरकार के मंत्री अगर भ्रष्टाचार की शिकायत बिहार के मुख्यमंत्री से करें तो सवाल उठना लाजमी है. ऐसी ही एक घटना में झारखंड सरकार के वरिष्ठ मंत्री सरयू राय ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अब राज्य के विकास आयुक्त अरुण सिंह के कुछ विवादास्पद निर्णय की जांच कराने का आग्रह किया है.

सरयू राय ने नीतीश के अलावा राज्य के जल संसाधन मंत्री ललन सिंह को भी पत्र लिखा है. जिसमें एक कंपनी फ़्लोमोर का ज़िक्र किया है, जिसे झारखंड में बिजली विभाग में 800 करोड़ से अधिक का काम मिला. लेकिन किसी ने ऊर्जा विभाग को सूचित किया कि ये कंपनी बिहार में 10 वर्षों तक सही काम नहीं करने के लिए ब्लैकलिस्टेड है. लेकिन इसने यह जानकारी छिपाई.

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सरयू राय द्वारा लिखे पत्र के अनुसार इस साल मार्च महीने में जल संसाधन विभाग के सचिव अरुण सिंह जो अब विकास सचिव हैं, उन्होंने एक आदेश निकालकर इस कंपनी के काली सूची में डाले जाने का पहले का आदेश निरस्त कर दिया. फिर उन्होंने एक और आदेश से अपने पुराने आदेश को, जिसमें इस कंपनी को दो वर्ष पूर्व काली सूची में डाला था उसे निरस्त किया. लेकिन झारखंड सरकार के ऊर्जा विभाग के अधिकारी इस बात पर जब अड़ गए कि इस कंपनी ने काली सूची में होने की जानकारी छिपायी और इसका रजिस्ट्रेशन रद्द है तब अरुण सिंह ने एक और आदेश निकाला कि कंपनी के निबंधन को पुराने तारीख़ से प्रभावी किया जाता है.

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सरयू राय ने नीतीश कुमार को लिखे अपने पत्र में कहा है कि बिहार सरकार के तीनो आदेश संदेहास्पद हैं. अरुण सिंह के एक महीने में एक के बाद एक तीनो आदेश जल्दबाज़ी में लिये गए हैं, जिनकी छानबीन कराई जानी चाहिए. हालांकि सिंह के क़रीबी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने आदेश वापस भी ले लिए, लेकिन फिर कोर्ट का आदेश हुआ कि वो अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे. लेकिन अरुण सिंह और सिंचाई विभाग में काम करने वाले अधिकारियों का मानना है कि राय भले कितने पत्र लिख ले और भले सिंह के समय ऐसे दर्जनों मामले विभाग में मिल जाएंगे जहां ब्लैक लिस्टेड कोंपनियो को राहत दी गई, लेकिन नीतीश चाहकर भी उनका बाल बांका नहीं कर सकते. उसका एक बड़ा कारण उस समय के मंत्री ललन सिंह से उनकी क़रीबी रही है. 

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